Horary astrology Applied
Use of Prashna Dasha and D /4 chart
18.*मकान बनाना है: Date 3-5-1983 Time 18-22. 20N46 72E58
में कई तरहके प्रयोग करता रहेता हूँ.
के पि सिसटम में जेसे १ से २४९ में से कोई एक संख्या पूछकर प्रश्न फल देखा जाता है वेसे ही परम्परागतमें १ से
१०८ में से कोई संख्यासे प्रश्न फल देखा जाता है.इसमे १०८ राशिचक्र के नवमांश की
संख्या है. आज यह पद्धति अजमायाश करनेकी चाहत हुई. एक सज्जनने प्रश्न किया अभी तक
किरायेके मकानमे है,अपना घर बनवाना है कब हो पायेगा. हमने १ से १०८ में से कोई
संख्या बतानेको कहा. उन्हों ने ९८ बताई. मतलब दश राशि पूर्ण और ११वि कुम्भ का ७वा
नवांश पूरण हो चुके है और ८वा नवामांश प्रारम्भ है. उपरोक्त समय अनुसार प्रश्न
कुंडली “Prashna
16” देखें. इसी कुंडलीमें संख्या

अनुसार कुम्भ लग्न वृषभ नवमांश मानकर संख्या प्रश्न कुंडली और समयानुसार प्रश्न कुंडलीमें लग्न तुला १०-२९ है.
अनुसार कुम्भ लग्न वृषभ नवमांश मानकर संख्या प्रश्न कुंडली और समयानुसार प्रश्न कुंडलीमें लग्न तुला १०-२९ है.
सर्व प्रथम संख्यासे बनी प्रश्न
कुंडलीकी कुम्भ लग्नकी चर्चा करेंगे.
१ कुम्भ लग्नसे चतुर्थ वृषभमें स्वगृही
शुक्र के साथ बुध है. लग्नसे चतुर्थेश शुक्र को लाभेश गुरु देखता है मगर गुरु वक्री
भी है
३ सूर्यसे चौथेमें कर्क राशी है
जिसका स्वामी चन्द्रमा अपनी राशिको देखता है. मतलब सुदर्शन पद्धति अनुसार तीनो
लग्नसे चतुर्थ स्थान बलवान है इसलिए अपना मकान बनानेकी इच्छा पूरण तो होगी मगर
चन्द्रका कोई शुभ त्रिकोण या अर्धत्रिकोण योग नहीं बनता ओर चन्द्रमा पहेले प्लूटोसे
बादमे शनिसे कठिन केंद्र योग बनाता है.इसलिए अपना घर बनानेमे काफी देर लगेगी.
अब समयानुसार प्रश्न कुंडली तुला
लग्नसे देखे. चन्द्र (मन) मकानके चतुर्थभाव मकर में है और चतुर्थेश शनि लग्न में उच्चका
मगर वक्री है. लाभेश सूर्यभी उच्चका है और लग्नस्थित चतुर्थेश शनिको
देखता है. यह सब योगभी इच्छा पूर्ती तो
दिखाते है मगर कब?
इसलिए प्रश्न दशा देखेंगे,जब भी
प्रश्न सिद्धि होने में देर दिखे तो दशाका विचार करना है. प्रश्न समय चन्द्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्रमें है. दशानाथ सूर्य लाभेश होते हुए भी, संख्या प्रश्न कुंडली
के लग्नेश शनि चतुर्थेश शुक्र और प्रश्न समय कुंडलीके लग्नेश शुक्र चतुर्थेश शनि
का शत्रु है. सूर्य चतुर्थांश (D/4) कुंडलीमें अष्टमेश होकर नीचराशि
तुलामे है.इसलिए सूर्य दशामे संभावित नहीं लगता.सूर्य दशाके बाद चन्द्रकी दशा
होगी. चन्द्र तुला लग्नसे चतुर्थमे है और लाभेश उच्चसूर्य के नक्षत्रमें है.चंद्र
चतुर्थांश कुंडलीमें (D/4) मकर लग्नमे वर्गोत्तमी है और
साथमें D/4 का चतुर्थेश मंगल
उच्चका है, इसलिए चन्द्र दशा मंगल अंतरा में करीब पांच साल बाद १९८८ मार्च से
सितम्बर के बिच अपना मकान बन सकता है. दोनों कुंडली के चतुर्थ(मकान और मातृभूमि)
में क्रमश: वृष और मकर दक्षिण दिशा सूचक राशी है.इसलिए प्रश्न जिस गाँवमें प्रश्न किया
था वहांसे दक्षिण दिशाकी ओर अपने वतनके नगरमे उन्होने करीब पांच साल बाद एपार्टमेंटमें
फ्लेट लिया.
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