Wednesday, October 30, 2013

Horary Astrology Applied 

 (Sale of property share gifted by father-in law)


17. * सयुंक्त साझेदारीका घर/मिल्कत बेचना है. 24-1-1990 Time 15-10 20N46 72E58

एक महिलाने प्रश्न किया मेरा बेटा स्वशुरसे मिली संयुक्त मिलकत/घर से अपना हिस्सा अन्य भागीदारको बेचना चाहता है. (See Prashna 14).यह एक इंटरेस्टिंग केस है. प्रश्न कुंडलीको कई तरिको से देखा जाता है. एक रीतिसे जैसे है वैसेही अर्थघटन किया जाता है और दूसरा सम्बंधित व्यक्तिके भावेसे भी देखा जाता है.

सर्व प्रथम जैसी प्रश्न कुंडली है उसे ही जांचे. लग्न प्रश्न पृच्छक है. प्रश्नमे चंद्रका बहुत महत्त्व है. चन्द्र तृतीयेश है, और त्तृतीयतस्थ केतुके मूल नक्षत्रमें है. केतु (separating ) विच्छेद्कारक/ मुक्तिका कारक है, जो चोथे मकान से बारहवे में है, यानी मकान छोड़नेकी  बात है.चतुर्थेश सूर्य ८वे में वसिहती मिल्कतके भावमें है. यह सब बातें  अम्माने कही बातोकी पुष्टि करती है. लाभेश गुरु धनभावमें है और धनेश बुध,चतुर्थेश सूर्य सप्तमेश मंगल और दशमेश शनि सबको देखता है इसलिए कार्यसिद्ध होगा.   


अब दुसरे ढंगसे सोचे. माता प्रश्नाकर्ता है इसलिए पंचमभाव पुत्रका है. अब लुन्दाली के पंचम भाव को पुत्र का लग्न मानकर देखेंगे. चन्द्रमा पुत्रके चतुर्थ मकानके भावमें है और केतुके नक्षत्रमें है. केतु पुत्रके लाभभावमें है. पुत्रको यह सम्पति अपने स्वशुर से मिली है. पंचम भाव पुत्र और एकादश पुत्रवधूका है. पुत्रवधूके एकादश भाव से नवम(पिता) यानी प्रश्न का सप्तम (वृश्चिक) भाव बेटे के श्वसुरजी का है. इसलिए कुम्भ स्वशुरजी की मिल्कत/जमीनका हुआ.. अब देखिये कुम्भ का स्वामी शनि, धनुमें स्वशुरजी के धनभावमें द्विस्वभाव धनुराशिमे कई ग्रहोंके साथ बेठा है. इससे साफ़ पता चलता है की उस मिलकतमें भी कईयोंका भाग/हक्क है. पंचमभाव(पुत्र)का लाभेश चन्द्र पुत्रके चतुर्थ(मकानके) भावमें है और लाभमें बैठे केतुके(मोक्ष) नक्षत्रमें है यानी पुत्रकी इच्छा कई साझेदारोवाली मिलकतसे छुटकारा पाना है, पुत्रका लाभेश चन्द्र पुत्रके लग्नेश बुधसे युति करने जा रहा है, और पुत्रके धनभाव तुलामे बैठे प्लूटोसे अर्धत्रिकोण शुभ इत्थसाल ((योग करने जा रहा है. याद रहें प्लूटो विसर्जन और सर्जनका ग्रह है. चन्द्रमा धनुमे ११-४४-२९ है और मध्यम १२-४७-५१ गतिसे चलकर बुध धनुमे १७-१०-३९(पांचवे महीने में) से युति और प्लूटो तुला २३-५८-०३(ग्यारवे महीने में) से अर्धत्रिकोण करने जा रहा है, मतलब आनेवाले कुछ ही महीनोमे मामला सुलझ जाएगा. परिणाम स्वरुप मामला बातचीत(बुध और मिथुन गुरु) से दस बारह महीनों में मामला सुलझ  गया. 
 

No comments:

Post a Comment