Thursday, September 12, 2013

Mundane Astrology वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थिति: स्वातंत्र्य कुंडलीसे विहंगावलोकन

 

Mundane Astrology 

मुंडेन एस्ट्रोलोजी
 

वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थिति: स्वातंत्र्य कुंडलीसे विहंगावलोकन
 
इसके लिए स्वातंत्र्य कुंडलीके संदर्भमें चर्चा करेंगे.जब १५अगस्त १९४७ समय मध्यरात्री आज़ादी प्राप्ति समय न्युदिल्ही में वृषका ७-४७  लग्न और चन्द्र कर्क३-५९-०६ है.तदनुसार वर्त्तमान विंशोत्तरी सूर्यदशा सितम्बर २००९से शुरू हुई जो सितम्बर २०१५तक है. सूर्य बुधके नक्षत्रमें है, बुध धनेश पंचमेश रे भावमें और चलितमें सूर्यसे १२वे भावमें है.इसलिए आर्थिक समस्या शुरू हुई. UPA 2 सरकार २२ मई २००९को बनी, तब गोचर सूर्य(सत्ता)वृषके ७अंश जो  आज़ादी के लग्न बिंदु वृष७ अंश पर ही था यह एक अच्छा योग था, मगर सूर्यके उपर सिंह में बैठे  शनिकी दशम दृष्टी थी. इसलिए सितम्बर २००९से सूर्यदशा प्रारम्भ हुई तब से आर्थिक और राजद्वारी समस्या प्रारम्भ हो गई.
सत्ता ग्रहण समय सूर्य वृष ७ अंश से गुरु+नेप्चून युति कुम्भ २अंशसे अशुभ केंद्र योग है, और आज़ादी कुंडली के कर्क सूर्य २७-५९के प्रतियोगमें है.सत्ताधारि पक्षको अत्यंत विकट परिस्थिति हो रही है. क्यूँ? गुरु नेप्चूनका अशुभ केंद्र योग, गुरुसे  (कोर्ट क़ानून)और नेप्चूनसे(गफला स्केंडल्स).
भारत आज़ादी कुंडलीमें सूर्यदशा है.इसी दरम्यान जब गोचर शनि, नवम्बर२०११ तक, कन्यामे था तब थोडा संभल गया, क्यूँ की गोचर शनि दशानाथ सूर्य से और चंद्रसे बहुत अच्छे तीसरे घरमें था. मगर शनिका तुला प्रवेशसे चतुर्थ में आनेसे परिस्थिति विकट हो गई.
राहूका नक्षत्र अनुराधामें फरवरी २०१२में प्रवेशसे दशानाथ सूर्य(कर्क २८)आश्लेषा में है उसको वेध किया और राहुका विशाखा प्रवेश ओक्टोबर २०१२ से आज़ादी के लग्न बिंदु वृष ७-४७ कृतिका को वेध करता है.अभी स्वातिमें अशुभ वेध नहीं करता सो ठीक है.
अब आनेवाले समय में कार्तिक पूर्णिमा का मांद्य ग्रहण स्वातंत्र्य कुंडली के चंद्रसे चतुर्थ में होने से किसी महत्वपूर्ण नेता के स्वास्थ्य चिंता और निवृति के सूचक भी है.शनिका विशाखा नक्षत्रमें नवम्बर २०१३से गोचर भ्रमण होगा. विशाखासे शनि आजादी का लग्न वृष ७-४७ कृतिकामें वेध करेगा और आज़ादी के चन्द्र बुध शुक्र सूर्य और प्लूटो से चतुर्थ होगा और विशेषत: जब तुलाके अंतिम अंश २९-१६ पर मार्च २०१४ स्थंभी और वक्री होगा तो बहुत कुछ उलटा पुलटा करेगा. 


 

शनि राहू युति: Date 25-9-2013 Time 18-00 IST New Delhi.

आनेवाले समय का विहंगावलोकन 

वर्त्तमानमें गोचर शनि और राहू तुलामें भ्रमण करते है. शनि और राहू की गति अलग और विपरीत होने से करीब 11 -12 वर्ष के बाद युति होती है. इसके पहेले सन २००२ जूनमें वृषभमें युति हुई थी. वर्त्तमानमें शनि+राहू युति तुलामे होनेवाली है. इसके पहले ओगष्ट १८०८ में  तुला२५ अंश पर युति हुई थी.मतलब २०५ वर्ष बाद फिरसे तुला में युति होने जा रही है. अब २५सितम्बर२०१३ शाम करीब ६ बजे शनि+राहू(mean) तुलाके अंश१५-२२कला पर युति होगी.
भारतकी रूलिंग राशि मकर है इसलिये भारतके दशम भाव में यह युति होतीहै. नइदिल्ही पर मकर १२-४६का रूलिंग है. हमारे अनुभव /अवलोकन में आया है की महत्वपूर्ण मंद गतिवाले ग्रहों की युति पश्चात्,युति बिंदु पर जो ग्रहण होता है वह बहुत निर्णायक होता है.
(१) नइदिल्ही पर मकर १२-४६का रूलिंग है और शनि+राहू तुलाके अंश१५-२२कला     पर युति शनि+राहू तुलाके अंश१५-२२कला पर युति होगी.
(२) ता. २५-९-२०१३ शनि+राहू युति तुला के अंश १५-२२कला पर होगी और .
ता.३-११-२०१३अमावास्या(दिवाली)का ग्रहण सूर्य तुला१७-१३और राहू तुला १३-१९ है. यह ग्रहण नइदिल्ही (भारत) मकर १२-४६के दशम भावमें है.
(३) भारत स्वातंत्र्य कुंडलीमें वृषभ लग्न ७-४७ और दशम कस्प मकर २१-२९ है, और सूर्य कर्क २७-५९ और शनि कर्क २०-२८ और प्लूटो कर्क २०-०७ है.
अब देखिये यह शनि+राहू युति और सूर्य ग्रहण दोनों भारत(नई दिल्ही)की रूलिंग मकर १२-४६से दशम(सत्ता)बिंदुसे अशुभ केंद्र योगमें है, और दशमेश शनिसे भी अशुभ केंद्र योगमें है.
 यह सब योग ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है की राजद्वारी उठक पटक, नए नए समीकरण, सत्ता पक्ष और विपक्षमें भी होंगे.सता परिवर्तन और विदेशनीति सरहदी विवाद/संघर्ष और चतुर्थ भाव जनता का भी है इस लिए पूरा समय  आतंरिक संघर्ष तनावका भी सूचक है. फिर भी  
१.नवेम्बर प्रथम सप्ताह २. डिसेम्बर द्वितीय सप्ताह ३.जनवरी प्रथम सप्ताह, ४.फेब्रुआरी-मार्च संधि, ५. एप्रिल तृतीय सप्ताह, ६.मई द्वितीय सप्ताह, और ७.जून प्रथम सप्ताह यह सब समय संधि राजकारणमें विशेष ध्यानाकर्षक और महत्वपूर्ण  और सत्ता परिवर्तनके  समय है.

   



       
        
                                                                              

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