Horary Astrology Applied
Horary Miscarriage: Date 12-2-1982 Time 16-05 IST 20N46 72E58
गर्भ हानी - कोई शुभ अवसर पर सब इकठ्ठे हुए थे.हसी ख़ुशीके माहोलमें
एक बहेनने सहज ही प्रश्न किया की “मेरी देवरानीको
क्या होगा बेटा या बेटी उसे पहेलेसे ही एक बेटी है” (अब बेटेकी अपेक्षा है) उन दिनों न कोम्प्यूटर थे न
सायंटिफिक केल्क्युलेटर, सहज गणितसे कुंडली बनाइ थीं,जिसकी कंप्यूटर कुंडली Horary Miscarriage
chart 5 देखें.
मिथुन लग्न २७ अंश है यानि नवांश भी
मिथुन का वर्गोत्तमी है.इस लिए जिवचिंता स्पष्ट दिखती है. अंतिम नवांश देखते हुए पूछा, कितने माह हुए? " तीसरा " यह दुविधा की बात हुई माह तीसरा और नवमांश आखरी है ! संतान प्रश्न में शनिकी
स्थिति मेरे अनुभव में गुरु चाबी है.यहाँ शनि चतुर्थमें(लड़की) मगर वक्री(परिणाम उलटा) और मंगलके साथ देखकर और भी दुविधा में पड गया क्या कहें, क्योकि स्पष्ट भावांश
नहीं थे.
शुक्रवार, कृष्ण पंचमी,हस्त नक्षत्र, शूल योग, नाम के अक्षर तिन है. केरल
प्रश्न नियम १ अनुसार शेष ० मतलब गर्भ नहीं एक ओर दुविधा !.
इसलिए दुविधामे था. थोडा
पोलिटिकल जवाब दिया “लगता तो बेटा है मगर कुछ भी कहेना अच्छा नहीं लगता” इस मोके पर एक
रिश्तेदार(आपकी सरनेम जोशी ही थी) चुटकी लेते ज्योतिषशास्त्र को और मुझे लक्ष्यकर चुभनेवाली कोमेंट करने लगे. तब
थोडे गुस्सेमे और ज्यादा जोशमें कह दिया अमंगल भविष्यवाणी नहीं करना चाहता फिर भी
आप इस विद्याकी मजाक करते हो तो सुनो “गर्भ हानि के योग है”
शास्त्रोमे सभामे, जनसमूहों में,
हंसी मजाक के माहोलमे ओर ताल ठोक कर (चेलेंज),
गुस्से मे,जुस्से में और विषाद में हो तब फलादेश नहीं करना एसी आज्ञा है. गलती मेरी ही
थी, समूह बिच जाहिर में प्रश्न कुंडली देखनी ही नहीं चाहिए थीं.
गर्भ हानि इसलिए कही की १.लग्न बिंदु पर राहू है
पंचमेश शुक्र केतुके साथ है. २.लग्नेश बुध वक्री ८वें नाश स्थानमे है.३.चन्द्र;
मंगल और शनि के साथ चतुर्थमें जो पंचम-संतान भावसे १२वाँ है. अब कुछ और मुद्दों भी
देखें लग्न मिथुन २७ अंश राहुभी २७ अंश है
और चतुर्थमें मंगल २५ और शनि २८ अंशपर है यानी अशुभ केंद्र योग और पंचमेश शुक्र भी
सप्तममें २९ अंश है यह भी अशुभ केंद्र योगमें है. इसलिए बताया गया की मीसकेरेज
गर्भहानीकी संभावना है, डॉक्टरसे परामर्श करें
तिन सप्ताह बाद खबर मिली की डॉक्टरका
अभिप्राय था की “बच्चाका विकास नहीं है और बचाना मुश्किल है” (इसलिए गिरगया या
गिरादिया गया, यह मुझे नहीं मालूम और गर्भ हानि की एक्ज़ेट तारीख भी नहीं मालूम)
जब यह खबर मिली तब हमने गर्भका ‘विकास
अल्पहै’ इस तथ्यको खोजनेके हेतु फिरसे प्रश्न कुंडलीका अभ्यास किया.
जो कुछ तथ्य नए समजमें आये वह इस प्रकार
है.
१. चन्द्र २१, मंगल २५, राहू/केतु २७, और शनि २८ अंश पर है, इसलिये चन्द्र आगे
चलकर क्रमसे मंगलसे युति फिर राहू/केतुसे अशुभ केंद्र योग करेगा र्ओर फिर आगे चलकर
शनिसे युति करेगा करेगा
२.पंचमेश शुक्र प्रश्न समय अति धीमी गतिका सिर्फ ५ कला
प्रतिदिन है.पंचमेशकी अत्यंत धीमी गतिका मतलब अल्प विकास, जितना विकास होना
चाहिए उतना नहीं.
३.पंचमेश शुक्र धनुमे २९-४८-५४ है यानी राशीके बिलकुल अंतमे है और उसकी मृत
अवस्था है.
४.शुक्र भी आगे चलकर अष्टम नाशभावमें आनेवाला है. इसलिए बहुत
जल्दी गर्भपात/गर्भहानिका कारण अल्प विक्सित और मृततुल्य गर्भ है, यह सत्य समज में आया.
इस तरह कुछ फलादेश सिद्ध होने बावजूद
भी पुराने किस्सेका अभ्यास करते रहेनेसे ओर भी सुक्ष्मता शिखनेको मिलती है. हम लोग
ज्यादातर सफल हुए किस्से याद रखते है मगर जिस मामलोंमें हमारा फलादेश गलत हुआ या
कुछ कम रहा हो उसके बारेमे सोचना जरुरी है. उसका पुन: पुन: विचार करें. हमने क्यों
और कहाँ गलती की थी इसके ऊपर विचार और अभ्यास करनेसे हमारा ज्ञान तेज होगा. मेंने
अपनी गलतियाँसे और आलोचनासे बहुत शिखा है.

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